अमेरिका ने टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल (HCL) सहित कुल 8 प्रमुख आईटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफ़िकेशन (PERM) प्रोग्राम के तहत ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने से प्रतिबंधित कर दिया है।
इस सूची में माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), एडोब, कैपजेमिनी (Capgemini) और कॉग्निजेंट (Cognizant) जैसी दिग्गज कंपनियां भी शामिल हैं। इस अचानक उठाए गए कदम से अमेरिका में कार्यरत हजारों भारतीय तकनीक पेशेवरों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि इस रोक का उद्देश्य घरेलू अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसरों की रक्षा करना और विदेशी श्रमिकों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है।
PERM एंप्लॉमेंट-बेस्ड ग्रीन कार्ड का मुख्य आधार होता है, जिसके माध्यम से कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में स्थायी निवास दिलाने की प्रक्रिया शुरू करती हैं।
हालांकि, हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि इन भारतीय आईटी कंपनियों ने पिछले कुछ समय से PERM आवेदनों में पहले ही कमी कर दी थी, जैसे टीसीएस ने वित्त वर्ष 2026 में केवल दो ही आवेदन दाखिल किए थे।
भारत सरकार और अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह निलंबन विशेष रूप से PERM प्रक्रिया से जुड़ा है और इसका प्रत्यक्ष असर H-1B वीजा धारकों के मौजूदा वीजा या उनकी कानूनी स्थिति पर नहीं पड़ेगा।
उद्योग संगठन इस स्थिति का आकलन कर रहे हैं कि क्या यह अमेरिकी नीति भारतीय आईटी कंपनियों के पारंपरिक कार्य मॉडल में बड़ा बदलाव लाएगी। इस नए प्रतिबंध से तकनीकी क्षेत्र में हलचल मच गई है और प्रवासी पेशेवर स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
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