(Left) Jasmine with mother and briother; with her baby
अमेरिका में भारतीय मूल की नर्स की कथित हत्या के बाद पंजाब में रहने वाली उसकी मां ने अपने 8 महीने के नाती की कस्टडी पाने के लिए भारत और अमेरिका की सरकारों से मदद की अपील की है।
कैलिफोर्निया में बेटी जैस्मिन औजला गिल की हत्या के बाद मां सुखविंदर कौर अपने नाती को भारत लाकर उसकी परवरिश करना चाहती हैं। परिवार ने दोनों देशों की सरकारों से मानवीय आधार पर हस्तक्षेप करने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, 30 वर्षीय जैस्मिन मूल रूप से पंजाब की रहने वाली थीं और अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित सैक्रामेंटो में रहती थीं। वह 30 सितंबर को अपने घर से लापता हो गई थीं।
इसके बाद 4 अक्टूबर को उनके एक रिश्तेदार ने उनकी गुमशुदगी की सूचना दी थी। इस बीच, 1 अक्टूबर को पड़ोसी एल डोराडो काउंटी में जले हुए और दफन किए गए मानव अवशेष मिले थे। बाद में इनकी पहचान जैस्मिन के रूप में हुई।
जैस्मिन के पति गुरिंदर सिंह गिल ने शुरुआत में अधिकारियों को बताया था कि जब जैस्मिन घर के बाहर डाक देखने गई थीं, तब अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी ICE के अधिकारी उन्हें अपने साथ ले गए थे।
हालांकि, जांच के दौरान ICE ने संबंधित पते पर किसी भी तरह की कार्रवाई होने से इनकार किया। पुलिस को पति के बयानों में भी कई विसंगतियां मिलीं।
जांच में यह भी सामने आया कि दंपती के बीच तलाक और बच्चे की कस्टडी को लेकर विवाद चल रहा था। पुलिस ने 14 अक्टूबर को गुरिंदर को गिरफ्तार कर हत्या के आरोप में मामला दर्ज किया।
जैस्मिन की मां सुखविंदर कौर ने भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों को औपचारिक आवेदन भेजकर अपने नाती को पंजाब लाने तथा उसकी कानूनी कस्टडी या अभिभावकत्व हासिल करने में मदद मांगी है।
परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी पत्र लिखे हैं।
परिवार ने जैस्मिन के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए भारत लाने और अमेरिका में चल रही कानूनी प्रक्रिया में शामिल होने के लिए आवश्यक सहायता की मांग भी की है।
परिवार के अनुसार, बच्चा फिलहाल अमेरिका में फोस्टर केयर में है। जैस्मिन की मां का कहना है कि उनकी बेटी की पूरी दुनिया अपने बच्चे के इर्द-गिर्द थी और वह नियमित रूप से बच्चे के वीडियो परिवार को भेजती थी।
अब वह अपने नाती को अपने पास रखकर उसकी परवरिश करना चाहती हैं। परिवार ने ‘जस्टिस फॉर जैस्मिन’ नाम से एक अभियान भी शुरू किया है।
2 नवंबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कस्टडी की मांग पर भारत या अमेरिकी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। बच्चे को भारत लाने का फैसला अमेरिकी कानूनी प्रक्रिया और कस्टडी संबंधी नियमों के अधीन होगा।
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