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2024 में ट्रंप को वोट देने वाले 25% दक्षिण एशियाई अमेरिकी अब डेमोक्रेट्स के समर्थन में: सर्वे

  • अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से पहले मतदाताओं के रुझान में बदलाव के संकेत
  • महंगाई, स्वास्थ्य सेवाएं और भेदभाव प्रमुख चिंताएं; 60% दक्षिण एशियाई मतदाता डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में

US midterms 2026 | 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को वोट देने वाले दक्षिण एशियाई अमेरिकी मतदाताओं में से 25% अब 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के कांग्रेस उम्मीदवारों को वोट देने की योजना बना रहे हैं। इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट द्वारा प्रायोजित और HIT स्ट्रैटेजीज द्वारा किए गए देशव्यापी सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है।

सर्वे के अनुसार, 2024 में ट्रंप का समर्थन करने वाले संभावित दक्षिण एशियाई अमेरिकी मतदाताओं में 67% अब भी रिपब्लिकन उम्मीदवारों को वोट देने की योजना बना रहे हैं, जबकि 25% डेमोक्रेट्स का समर्थन करना चाहते हैं। हालांकि, सर्वेक्षण यह स्पष्ट नहीं करता कि मतदाताओं के रुख में बदलाव के पीछे कौन-से कारण हैं।

सभी संभावित दक्षिण एशियाई अमेरिकी मतदाताओं को मिलाकर देखें तो 60% ने डेमोक्रेटिक कांग्रेस उम्मीदवारों को वोट देने की इच्छा जताई। वहीं, 22% रिपब्लिकन उम्मीदवारों के पक्ष में थे और 17% मतदाता अभी अनिर्णीत थे। 2024 में कमला हैरिस को वोट देने वालों में से 96% ने आगामी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन करने की बात कही।

सर्वेक्षण में मिशिगन और टेक्सास जैसे राज्यों में दक्षिण एशियाई मतदाताओं की संभावित चुनावी भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया है। इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट के अनुसार, मिशिगन में लगभग 1,87,000 दक्षिण एशियाई निवासी हैं। 2022 के मध्यावधि चुनाव में राज्य के करीब 30,000 पंजीकृत दक्षिण एशियाई मतदाताओं ने मतदान नहीं किया था। यह संख्या 2024 के अमेरिकी सीनेट चुनाव में जीत-हार तय करने वाले लगभग 19,000 मतों के अंतर से अधिक थी।

टेक्सास में 7 लाख से अधिक दक्षिण एशियाई निवासी हैं। वहां भी 2022 के चुनाव में लगभग 1 लाख पंजीकृत दक्षिण एशियाई मतदाताओं ने मतदान नहीं किया था। हालांकि, ये आंकड़े यह नहीं बताते कि मतदान नहीं करने वाले लोग भविष्य में किस पार्टी का समर्थन करेंगे।

इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने कहा कि दक्षिण एशियाई अमेरिकी मतदाता ऐसे नेताओं को चाहते हैं जो जीवनयापन की लागत कम करें, स्वास्थ्य सेवाओं की रक्षा करें और बढ़ते भेदभाव से निपटें। उनके अनुसार, करीबी मुकाबले वाले चुनावों में यह समुदाय निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

सर्वेक्षण में जीवनयापन की लागत सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी। 65% मतदाताओं ने इसे प्रमुख मुद्दा बताया। इसके बाद 53% ने स्वास्थ्य सेवाओं, 33% ने नौकरियों और वेतन तथा 28% ने शिक्षा को अहम मुद्दा माना। डेमोक्रेटिक, रिपब्लिकन और निर्दलीय मतदाताओं के बीच भी आर्थिक चिंताएं प्रमुख रहीं।

भेदभाव से जुड़े निष्कर्ष भी महत्वपूर्ण रहे। 90% पंजीकृत दक्षिण एशियाई अमेरिकी मतदाताओं ने कहा कि उन्होंने स्वयं भेदभाव का सामना किया है या किसी परिचित के साथ ऐसा होते देखा है। वहीं, 48% ने व्यक्तिगत रूप से भेदभाव का अनुभव करने की बात कही। ऐसे लोगों में 63% ने दक्षिण एशियाई संस्कृतियों से अनजान अन्य अमेरिकियों के साथ हुए अनुभवों का उल्लेख किया, जबकि 24% ने कार्यस्थल या स्कूल में भेदभाव की बात कही।

इसके बावजूद, 75% उत्तरदाताओं ने कहा कि वे अमेरिकी नागरिक के रूप में पूरी तरह स्वीकार किए जाने का अनुभव करते हैं। लगभग 89% ने बताया कि अमेरिका में अन्य दक्षिण एशियाई लोगों के साथ होने वाली घटनाएं उनके अपने जीवन को भी प्रभावित करती हैं। ऐसे प्रभाव को अधिक महसूस करने वाले संभावित मतदाताओं में 71% डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को वोट देने के पक्ष में थे। इसी समूह के 58% लोगों ने अमेरिकी शहरों में ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) की कार्रवाइयों का विरोध किया।

राजनीतिक प्रतिनिधियों के प्रति असंतोष भी सामने आया। 79% उत्तरदाताओं का मानना था कि निर्वाचित प्रतिनिधि आम लोगों से जल्दी दूर हो जाते हैं, जबकि 67% ने कहा कि अधिकारी उनके जैसे लोगों की राय की परवाह नहीं करते। इसके बावजूद, 78% लोगों का विश्वास था कि उनका वोट बदलाव ला सकता है।

निर्दलीय मतदाता भी महत्वपूर्ण समूह के रूप में सामने आए। किसी भी प्रमुख पार्टी की ओर झुकाव नहीं रखने वाले मतदाता पंजीकृत उत्तरदाताओं के 17% थे। इनमें 72% अभी तय नहीं कर पाए थे कि कांग्रेस चुनाव में किसे वोट देंगे, जबकि 55% ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में मतदान नहीं किया था।

सर्वेक्षण दक्षिण एशियाई अमेरिकी समुदाय की राजनीतिक प्राथमिकताओं, आर्थिक चिंताओं और भेदभाव से जुड़े अनुभवों को समझने में मदद करता है। हालांकि, इसके निष्कर्ष अंतिम चुनाव परिणामों की भविष्यवाणी नहीं करते और न ही मतदाताओं के रुख में बदलाव के कारणों को निर्णायक रूप से स्थापित करते हैं।

Chief Editor

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